महात्मा गांधी की कर्मभूमि से उठी हुंकार, 30 जनवरी को भूमिहीनों का बेतिया में महासंग्राम।
बेतिया से वकीलुर रहमान खान की ब्यूरो रिपोर्ट।
बेतिया (पच्छिम चम्पारण)
महात्मा गांधी की कर्मभूमि पश्चिम चंपारण एक बार फिर इतिहास रचने की दहलीज पर खड़ी है। भूमिहीनों पर जारी नोटिस और प्रस्तावित बुलडोजर कार्रवाई के खिलाफ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) पश्चिम चंपारण ने निर्णायक संघर्ष का ऐलान कर दिया है। भाकपा के जिला सचिव ओमप्रकाश क्रांति ने स्पष्ट किया है कि 30 जनवरी, शहादत दिवस के दिन पूरे जिले के भूमिहीन परिवार बेतिया पहुंचकर जिला पदाधिकारी का घेराव करेंगे और अपने हक व आशियाने की लड़ाई को निर्णायक मोड़ तक ले जाएंगे।
ओमप्रकाश क्रांति ने कहा कि बिहार सरकार ने खुद कानून बनाकर यह वादा किया था कि यदि सरकार के पास उपलब्ध जमीन नहीं होगी, तो वह जमीन खरीदकर प्रत्येक भूमिहीन परिवार को 5 डिसमिल जमीन के साथ पक्का मकान देगी। लेकिन आज वही सरकार अपने ही कानून को ताक पर रखकर गरीब, लाचार और भूमिहीन परिवारों को नोटिस थमाकर उनके घरों पर बुलडोजर चलाने की तैयारी कर रही है। यह न सिर्फ अमानवीय है बल्कि संविधान और सामाजिक न्याय की भावना के भी खिलाफ है।
उन्होंने बताया कि बेतिया नगर निगम, चनपटिया, लौरिया, योगापटटी, सिकटा, मैनाटांड, मझौलिया नौतन, बैरिया सहित कई इलाकों में सैकड़ों भूमिहीन परिवारों को नोटिस जारी किए गए हैं। इन नोटिसों के खिलाफ भूमिहीन परिवारों में गहरा आक्रोश है। भाकपा ने ऐलान किया है कि इन सभी नोटिसों का सामूहिक और लोकतांत्रिक जवाब 30 जनवरी को जिला पदाधिकारी को सौंपा जाएगा, ताकि सरकार और प्रशासन को साफ संदेश दिया जा सके कि गरीबों को उजाड़ने की साजिश किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
भाकपा जिला सचिव ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि बेतिया राज की जमीन उत्तर प्रदेश में भी मौजूद है, लेकिन वहां सरकार कोई कार्रवाई नहीं कर रही। आखिर क्यों सिर्फ पश्चिम चंपारण में गरीब भूमिहीनों को निशाना बनाया जा रहा है क्या सरकार को बड़े भू-स्वामियों और पूंजीपतियों से डर लगता है उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार गरीबों पर अत्याचार कर पूंजीपतियों को खुश करने की नीति पर चल रही है।
क्रांति ने दो टूक शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार वास्तव में कानून और न्याय पर विश्वास करती है, तो उसे पहले सभी भूमिहीन परिवारों को 5 डिसमिल जमीन और पक्का मकान उपलब्ध कराना होगा। इसके बिना किसी भी परिवार पर बुलडोजर चलाया गया, तो भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी चुप नहीं बैठेगी। यह लड़ाई अब केवल नोटिस की नहीं, बल्कि अस्तित्व और सम्मान की लड़ाई बन चुकी है।
उन्होंने कहा कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और पश्चिम चंपारण के भूमिहीन परिवार पूरी तरह एकजुट हैं। अगर संघर्ष आर-पार का हुआ, तो भी पार्टी और भूमिहीन जनता पीछे हटने वाली नहीं है। सरकार और उसके पदाधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि किसी भी भूमिहीन के घर पर बुलडोजर चलाने की कोशिश की गई, तो उसे लेकर आने वालों की जिम्मेदारी प्रशासन की होगी, क्योंकि जनता अब अन्याय के खिलाफ सड़कों पर उतरने का मन बना चुकी है।
भाकपा ने दावा किया है कि 30 जनवरी को बेतिया की सड़कों पर जनसैलाब उमड़ेगा। पूरे पश्चिम चंपारण जिले से लाखों भूमिहीन, मजदूर, किसान और आम लोग इस आंदोलन में शामिल होकर अपनी आवाज बुलंद करेंगे। महात्मा गांधी की शहादत दिवस पर उनकी कर्मभूमि से अन्याय, दमन और विस्थापन के खिलाफ एक मजबूत संदेश जाएगा।
अंत में ओमप्रकाश क्रांति ने कहा कि पश्चिम चंपारण की धरती ने आज़ादी की लड़ाई का इतिहास रचा है और अब यही धरती भूमि, रोटी और मकान के अधिकार की लड़ाई में भी नया इतिहास रचेगी। 30 जनवरी को होने वाला यह आंदोलन केवल विरोध नहीं, बल्कि गरीबों के हक और इंसाफ की निर्णायक लड़ाई का एलान है।
