लौरिया में इस भीषण ठंड में हरियाली पर कुल्हाड़ी पड़ा भारी।
लौरिया से राजा मिश्रा के सहयोग से बेतिया से वकीलुर रहमान खान की ब्यूरो रिपोर्ट।
लौरिया (पच्छिम चम्पारण)
एक ओर सरकार पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर लौरिया क्षेत्र में खुलेआम पेड़ों की अंधाधुंध कटाई प्रशासनिक उदासीनता की कहानी बयां कर रही है। भीषण ठंड के बीच असामाजिक तत्वों द्वारा सड़क किनारे, नहरों के किनारे और सरकारी जमीन पर लगे पेड़ों की लगातार कटाई की जा रही है।
वहीं लौरिया–रामनगर मुख्य मार्ग, लौरिया–नरकटियागंज मुख्य मार्ग के दोनों ओर, किनारे तथा अन्य सरकारी भू-भागों पर वर्षों पुराने हरे-भरे पेड़ों को बेधड़क काटा जा रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, कुछ वर्ष पूर्व इन मार्गों पर सैकड़ों की संख्या में पेड़ हुआ करते थे, जो न केवल पर्यावरण संतुलन बनाए रखते थे बल्कि राहगीरों को छाया भी प्रदान करते थे। लेकिन अब हालात ऐसे हैं कि पेड़ों की संख्या नगण्य रह गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि ठंड के मौसम में लकड़ी की मांग बढ़ते ही असामाजिक तत्व सक्रिय हो जाते हैं और रात के अंधेरे में या दिनदहाड़े ही पेड़ों पर कुल्हाड़ी चला दी जाती है। इस अवैध कटाई से पर्यावरण को गंभीर क्षति पहुंच रही है, वहीं भविष्य में क्षेत्र में जलवायु असंतुलन और गर्मी की समस्या और गहराने की आशंका भी बढ़ गई है।
इस मामले को लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं और जागरूक नागरिकों ने गहरी चिंता जताई है। उन्होंने प्रशासन से अवैध पेड़ कटाई पर तत्काल रोक लगाने, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने तथा वन एवं राजस्व विभाग की संयुक्त निगरानी बढ़ाने की मांग की है। साथ ही कटे हुए पेड़ों के स्थान पर बड़े पैमाने पर पौधारोपण कराने की भी अपील की गई है।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर कब तक आंखें मूंदे रहता है, या फिर हरियाली बचाने के लिए ठोस कदम उठाए जाते हैं।
