हाड़ कंपा देने वाली ठंड से थर्राया लौरिया, अलाव की मांग हुई तेज।
लौरिया से राजा मिश्रा के सहयोग से बेतिया से वकीलुर रहमान खान की ब्यूरो रिपोर्ट।
लौरिया (पच्छिम चम्पारण)
प्रखंड क्षेत्र में इन दिनों कड़ाके की ठंड ने अपना विकराल रूप दिखाना शुरू कर दिया है। घने कोहरे और सर्द हवाओं ने पूरे इलाके को अपनी गिरफ्त में ले लिया है। सुबह होते ही सड़कें धुंध में लिपट जाती हैं और दृश्यता इतनी कम हो जाती है कि वाहन रेंगते नजर आते हैं। ठंड का असर इतना ज्यादा है कि लोग अनावश्यक रूप से घरों से निकलने से बच रहे हैं।
इस भीषण ठंड की चपेट में बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं और मजदूर सभी हैं। खुले में रहने वाले लोग, ठेले-खोमचे वाले और रोज कमाने-खाने वाले सबसे अधिक परेशान हैं। जगह-जगह लोग खुद ही अलाव जलाकर ठंड से राहत पाने की कोशिश कर रहे हैं। मवेशियों पर भी ठंड का असर साफ दिख रहा है, जो खुले में कांपते नजर आ रहे हैं।
प्रखंड प्रशासन से मांग की है कि लौरिया के सभी प्रमुख चौक-चौराहों, बस स्टैंड, बाजार और सार्वजनिक स्थलों पर अविलंब अलाव की समुचित व्यवस्था कराई जाए। सामाजिक कार्यकर्ता संतोष जायसवाल, रीतेश मनोहर और अंगूर सहित अन्य लोगों ने भी प्रशासन से इस ओर गंभीरता से ध्यान देने की अपील की है।
नगर पंचायत के अधिकारियों का कहना है कि सार्वजनिक स्थानों पर प्रतिदिन अलाव की व्यवस्था की जा रही है, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह व्यवस्था नाकाफी है और कई इलाकों में अब भी ठंड से बचाव के कोई इंतजाम नहीं हैं।
सबसे ज्यादा परेशानी गन्ना किसानों को हो रही है, जो मिल में गन्ना गिराने के लिए घंटों लाइन में खड़े रहने को मजबूर हैं। वहां ठंड से बचाव के लिए न तो अलाव की व्यवस्था है और न ही बैठने की कोई समुचित जगह। किसानों का कहना है कि इस कड़ाके की ठंड में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव उनकी मुश्किलें और बढ़ा रहा है।
अब सवाल यह है कि प्रशासन कब तक सिर्फ बयानबाजी करता रहेगा और कब जमीन पर ठोस कदम उठाएगा।
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