कचरे से सुरों तक: जमशेदपुर का पिंटू उर्फ़ ‘धूम’ जब एक आवाज़ बन गई पहचान

कचरे से सुरों तक: जमशेदपुर का पिंटू उर्फ़ ‘धूम’ जब एक आवाज़ बन गई पहचान

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कचरे से सुरों तक: जमशेदपुर का पिंटू उर्फ़ ‘धूम’
जब एक आवाज़ बन गई पहचान

जमशेदपुर: शहर की सड़कों पर दिन-भर कचरा बीनकर गुज़ारा करने वाला पिंटू—जिसे मोहल्ले के लोग “धूम” के नाम से जानते हैं—कभी सपने में भी नहीं सोच सकता था कि उसकी आवाज़ एक दिन लाखों दिलों तक पहुंचेगी। न मंच था, न माइक और न ही कोई पहचान। पहचान बनी तो बस उसकी सादगी और सुरों की सच्चाई से।
हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक छोटे-से वीडियो में पिंटू मुस्कुराते हुए कहता है।
“ले बेटा… कृष का गाना सुनेगा”
और फिर बॉलीवुड गीत Dil Na Diya को गुनगुनाने लगता है। कुछ ही सेकंड का यह वीडियो लोगों के दिलों को छू गया और देखते-देखते पिंटू इंटरनेट की दुनिया में चर्चा का विषय बन गया।

साधारण जीवन, असाधारण आवाज़

पिंटू की दिनचर्या आज भी वही है, सुबह निकलना, कचरा बीनना और किसी तरह दिन काटना। लेकिन उसके सुरों में वह दर्द, वह सच्चाई और वह मासूमियत है, जो सीधे दिल तक पहुंचती है। शायद इसी वजह से लोग उसके वीडियो को बार-बार देख रहे हैं और साझा कर रहे हैं।

हुनर को मंच की ज़रूरत नहीं

पिंटू की कहानी उन तमाम लोगों के लिए एक आईना है, जो मानते हैं कि हुनर दिखाने के लिए बड़े मंच और संसाधन ज़रूरी होते हैं। यह कहानी बताती है कि काबिलियत हालात की मोहताज नहीं होती। कई बार सबसे बड़ी प्रतिभा वहीं जन्म लेती है, जहां समाज की नज़र कम ही जाती है।

सोशल मीडिया बना आवाज़

आज सोशल मीडिया ने पिंटू जैसे अनगिनत लोगों को आवाज़ दी है। मोबाइल कैमरे और इंटरनेट ने उस दीवार को तोड़ा है, जो कभी गरीब और प्रतिभाशाली लोगों के बीच खड़ी थी। पिंटू की वायरल होती आवाज़ इस बदलाव की एक मिसाल है।
पिंटू उर्फ़ ‘धूम’ की यह कहानी सिर्फ एक वायरल वीडियो नहीं, बल्कि एक संदेश है,
अगर सुर सच्चे हों, तो भीड़ खुद रास्ता बना देती है।

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