नगर निगम बेतिया के सम्राट अशोक भवन के सभागार में 76 वां संविधान सम्मान सह आत्मअर्पण दिवस समारोह का हुआ आयोजन।

नगर निगम बेतिया के सम्राट अशोक भवन के सभागार में 76 वां संविधान सम्मान सह आत्मअर्पण दिवस समारोह का हुआ आयोजन।

Bettiah Bihar West Champaran

नगर निगम बेतिया के सम्राट अशोक भवन के सभागार में 76 वां संविधान सम्मान सह आत्मअर्पण दिवस समारोह का हुआ आयोजन।

बेतिया से वकीलुर रहमान खान की‌ ब्यूरो रिपोर्ट।

बेतिया (पच्छिम चम्पारण)
बेतिया नगर निगम के सम्राट अशोक भवन के सभागार में 76वां संविधान सम्मान सह आत्म अर्पण दिवस समारोह प्रबुद्ध भारती एवं योग भारती के तत्वावधान में बड़े धूमधाम से उल्लासपूर्वकआयोजित की गई।उक्त कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्रबुद्ध नागरिक, पदाधिकारीगण,एडवोकेट, शिक्षक,महिलाएं शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत में संविधान के चित्र पर पुष्पांजलिअर्पित किया गया। कार्यक्रम कीअध्यक्षता कर रहे श्विजय कश्यप ने संविधान की भूमिका पर प्रकाश डाला ।योग भारती के जिला संयोजक,जगदेव प्रसाद द्वारा संविधान की प्रस्तावना को पढ़ा गया,साथ ही उपस्थित लोगों ने प्रस्तावना का संकल्प पाठ किया।भारतीय संविधान के शिल्पकार तथाआधुनिक भारत निर्माता,भारत रत्न, बाबा साहेब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर द्वारा भारत के सभी वर्गों के हितों के लिए किए गए कार्य मौलिक अधिकार एवं मूल कर्तव्य का पम्पलेट सभी के बीच वितरण किया गया।अध्यक्षीय उद्बोधन में विजय कश्यप ने कहा कि अपना देश जो विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र रहा है,जिसे सोने की चिड़िया कहलाता था।गुलामी के कारणों में जिन विशेष कारणों के कारण देश बदहाल एंव बेहाल हुआ, उनका निराकरण संविधान निर्माताओं नेअनुच्छेद13मे सभी पुराने बीमारियों का समूल नाश किया,अनुच्छेद 340,41एवं 42 के द्वारा देश की संपूर्णआबादी को इस देश को परम वैभव पर पहुंचाने में सहयोगी एवं भागीदार बनने का मार्ग प्रशस्त किया। महिलाओं के बारे बोलते हुए उप महापौर,गायत्री देवी ने कहा कि हमारे संविधान ने महिलाओं कोआरक्षण, मातृत्वअवकाश,पुरुषों के समान वेतन,बहुत सारे अधिकार देकर उनकाआत्म सम्मान,आत्मनिर्भर बनाया। योग भारती के संयोजक, जगदेव प्रसाद ने कहा कि देश के सभी नागरिकों को बराबरी का दर्जा देखकर समानता, समरसता को मजबूत बनाता है। नागरिकों के गरिमा,हितों की रक्षा करता है। हमारा संविधान प्रत्येक भारतवासी को समानअवसर देता है,धर्म, जाति,लिंग केआधार पर कोई भेदभाव नहीं करता है। बैजनाथ प्रसाद ने कहा अधिकार के साथ-साथ कर्तव्य के प्रति भी जागरूक होना जरूरी है।फुर्सत मिले तो मुझे तुम पढ़ना जरूर,मैं तुम्हारे मुश्किलों का मुकम्मल समाधान हूं,मैं भारत का संविधान हूं।”
अधिवक्ता,शीला मिश्रा ने कहा कि आज महिलाएं सर्वोच्च राष्ट्रपति पद को सुशोभित कर रही है,यह हमारे संविधान का ही देन है।वक्ताओं में, अधिवक्ता सईदुल्लाह,चंद्रदेव राम,बिहारीलाल साहू, समाजसेवी,नवेंदु चतुर्वेदी, अंचलाधिकारी,सुनील राम समाजसेवी,अनिल राम, प्विकास मित्रअध्यक्ष,धर्मेंद्र राम,अनुसूचित जाति जनजाति कर्मचारी संघ के सचिव शिक्षक,सुरेंद्र राम, विधि छात्र,अभिरुप कुमार, अधिवक्ता,निखिलचंद्र पांडे के द्वारा भी संबोधित किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में रामाशीष शर्म,विनय कुमार, आनंद राम,अशोक राम,सीमा देवी,सुमन कुमारी,अधिवक्ता गीतांजलि कुमारी,जितेंद्र जायसवाल,सेवानिवृत्त डायट लेक्चररआदि का सराहनीय योगदान रहा।

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